बिड-आस्क स्प्रेड

यह किसी कमोडिटी के किसी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के बाय/बिड प्राइस (खरीदार जिस कीमत को चुकाने के लिए तैयार है) और आस्क/सेल (बिकवाल जिस कीमत पर बेचने के लिए तैयार है) के बीच का अंतर है। कोई ट्रेड खरीदार के लिए आस्क प्राइस और बिकवाल के लिए बिड प्राइस पर होता है, जिसे ट्रेडिंग टर्मिनल में लॉग-इन किया जाता है। बिड-आस्क स्प्रेड किसी कमोडिटी में आपूर्ति-मांग की स्थिति बताता है। अलग-अलग कमोडिटी के स्प्रेड पर उस कमोडिटी के कॉन्ट्रैक्ट में लिक्विडिटी का असर पड़ता है। जब यह अंतर या स्प्रेड कम होता है तो इसका मतलब है कि बाजार में खरीदारी और बिकवाली की राय में समानता है। लेकिन स्प्रेड असाधारण रूप से ज्यादा होने का मतलब यह है कि बाजार में एक पक्ष का ज्यादा दबदबा है। अगर स्प्रेड पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि बिकवाल मजबूत स्थिति में हैं और अगर यह निगेटिव है तो इसका मतलब है कि बाजार में खरीदार अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे ट्रेडर्स को निवेश की रणनीति बनाने में मदद मिलती है। कमोडिटी एफएंडओ और स्पॉट डिटेल के लिए कमोडिटी के नाम पर क्लिक करें।

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रुपया नौ पैसे मजबूत होकर 74.18 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ

मुंबई, 24 जून (भाषा) रुपये में लगातार दूसरे दिन तेजी रही। घरेलू शेयर बाजार में तेजी के बीच रुपया नौ पैसे मजबूत होकर 74.18 प्रति डालर पर बंद हुआ। इसके अलावा, अमेरिकी मुद्रा की कमजोर एमएसीडी बीबी संकेतक की उपस्थिति होने से भी रुपये में तेजी आई। अन्तरबैंक विदेशीमुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 74.20 पर खुली तथा दिन के कारोबार के दौरान 74.16 रुपये प्रति डालर के दिन के उच्च स्तर और 74.25 के निम्न स्तर को छूने के बाद अंत में रुपया नौ पैसे बढ़कर 74.18 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के

इसके अलावा, अमेरिकी मुद्रा की कमजोर होने से भी रुपये में तेजी आई।

अन्तरबैंक विदेशीमुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 74.20 पर खुली तथा दिन के कारोबार के दौरान 74.16 रुपये प्रति डालर के दिन के उच्च स्तर और 74.25 के निम्न स्तर को छूने के बाद अंत में रुपया नौ पैसे बढ़कर 74.18 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत घटकर 91.72 रह गया।

वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 0.23 प्रतिशत बढ़कर 75.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बंबई शेयर बाजाार का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक 392.92 इंक की तेजी के साथ 52,699 अंक पर बंद हुआ।

शेयर बाजार आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशक पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने बृहस्पतिवार को सकल आधार पर 2,890.94 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।

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20 मई: शेयर बाजार से क्या करें उम्मीद? इन स्टॉक्स पर होगी नजर

मार्केट में स्टॉक आधारित व्यापार बेहतर विकल्प हो सकता है.

20 मई: शेयर बाजार से क्या करें उम्मीद? इन स्टॉक्स पर होगी नजर

भारतीय शेयर बाजार बीते दिन बुधवार को मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ था. वॉलिटेलिटी के बीच बेंचमार्क इंडेक्स BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी करीब 0.5% कमजोर हुए. विदेशी बाजारों से कमजोर संकेतों का मार्केट पर असर दिखा था. गिरावट से सेंसेक्स 50000 के नीचे आ गया है. वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 15,000 के ऊपर बरकरार है.

मार्केट में स्टॉक आधारित व्यापार बेहतर विकल्प हो सकता है. तिमाही नतीजों, विदेशी बाजारों से संकेत, FII निवेश, कोविड और वैक्सीनेशन की स्थिति का मार्केट पर असर होगा.

विदेशी बाजारों में क्या हो रहा है?

एशिया के बाजारों में सुबह मिश्रित दिशा दिख रही है. जापान और थाईलैंड के बाजारों में तेजी है. वहीं, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, ताइवान और चीन के बाजार लाल निशान में व्यापार में हैं.

बीते दिन के व्यापार में US का S&P 500 इंडेक्स 0.29% जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (DJIA) इंडेक्स 0.48% कमजोर हुआ.

भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत देने वाला सिंगापुर का SGX निफ्टी इंडेक्स सुबह 7:00 बजे 0.20% की उछाल के साथ 15,066.50 पर व्यापार कर रहा है.

बाजार पर इसका भी असर-

मनीकंट्रोल के अनुसार निफ्टी के लिए 20 मई को 14,981.53 और 14,932.87 सपोर्ट स्तर हैं, जिससे नीचे जाने के बाद इंडेक्स टूट सकता है. इसी तरह 15,106.13 और 14,932.87 रेजिस्टेंस लेवल है, जिससे ऊपर पहुंचने से निफ्टी को उछाल मिल सकती है.

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा 19 मई को बाजार में 697 करोड़ के शेयरों की बिक्री की गई. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 852 करोड़ के स्टॉक खरीदे बेचे.

19 मई को बल्क डील में कोफोर्ज के प्रमोटर Hulst BV ने कंपनी के 31 लाख शेयरों को ₹3250.58 की दर पर बेचा. एक अन्य डील में एलारा इंडिया अपॉर्चुनिटी फंड ने बेस्ट एग्रोलाइफ के करीब 1 लाख 78 हजार शेयरों की ₹205.99 के दर पर बिक्री की.

इन शेयरों पर होगी नजर-

मार्च तिमाही में कंपनी का नेट लॉस पिछली तिमाही की तुलना में (QoQ) 16% घटते हुए ₹276 करोड़ रहा. नेट इंटरेस्ट इनकम 4% गिरकर ₹777 करोड़ पर आ गया है.

मार्च तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट क्वार्टर ऑन क्वार्टर (QoQ) 16% कम होते हुए 189 करोड़ पर पहुंच गया. रेवेन्यू 6% की गिरावट के बाद 2927 करोड़ पर आ गया है.

बैंक के ऑफर फॉर सेल को नॉन रिटेल निवेशकों द्वारा 4 गुणा सब्सक्राइब किया गया. रिटेल निवेशकों के लिए OFS गुरुवार को खुलेगा.

फिच रेटिंग्स ने कंपनी के रेटिंग को BB में स्टेबल आउटलुक पर अपग्रेड किया.

LIC ने करीब 59 लाख शेयरों की खरीद करके कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को 7.04% से 9.07% तक पहुंचाया.

भारत में भुखमरी खतरनाक स्तर पर, पाकिस्तान बांग्लादेश से भी बदतर हालात

modi in lockdown

जीएचआई का कुल स्कोर 100 पॉइंट होता है, जिसके आधार पर किसी देश की भूख की गंभीरता की स्थिति दिखती है। यानी के अगर किसी देश का स्कोर ज़ीरो है तो उसकी अच्छी स्थिति है और अगर किसी का स्कोर 100 है तो उसकी बेहद ख़राब स्थिति है।

भारत का स्कोर 29.1 है जो कि बेहद गंभीर श्रेणी में आता है।

इसके अलावा कुल ऐसे 17 शीर्ष देश हैं, जिनका स्कोर 5 से भी कम हैं। इन देशों में चीन, तुर्की, कुवैत, बेलारूस, उरुग्वे और चिली जैसे देश शामिल हैं।

वहीं मुस्लिम बहुल देशों की स्थिति की बात करें तो यूएई 18वें, उज़्बेकिस्तान 21वें, कज़ाख़स्तान 24वें, ट्यूनीशिया 26वें, ईरान 29वें, सऊदी अरब 30वें स्थान पर है।

भारत की स्थिति

जीएचआई जिन चार पैमानों पर मापा जाता है उसमें से एक बच्चों में गंभीर कुपोषण की स्थिति को देखें तो भारत में इस बार उसे 19.3 फ़ीसदी पाया गया है जबकि 2014 में यह 15.1 फ़ीसदी था. इसका अर्थ है कि भारत इस पैमाने में और पिछड़ा है।

वहीं अगर कुल कुपोषण के पैमाने की बात की जाए तो वो भी काफ़ी बढ़ी है। ये पैमाना देश की कुल आबादी कितना खाना खाने की कमी का सामना कर रही है उसको दिखाता है।

इंडेक्स के मुताबिक़, भारत में 2018 से 2020 के बीच जहाँ ये 14.6 फ़ीसदी था वहीं 2019 से 2021 के बीच ये बढ़कर 16.3 फ़ीसदी हो गया है. इसके मुताबिक़ दुनिया में कुल 82.8 करोड़ लोग जो कुपोषण का सामना कर रहे हैं उसमें से 22.4 करोड़ लोग सिर्फ़ भारत में ही हैं।

हालांकि, इस इंडेक्स में भारत के लिए अच्छी भी ख़बर है. इस इंडेक्स के दो पैमानों में भारत बेहतर ज़रूर हुआ है ।

बच्चों के विकास में रुकावट से संबंधित पैमाने में भारत 2022 में एमएसीडी बीबी संकेतक की उपस्थिति 35.5 फ़ीसदी है जबकि 2014 में यह 38.7 फ़ीसदी था।

वहीं बाल मृत्यु दर 4.6 फ़ीसदी से कम होकर 3.3 फ़ीसदी हो गई है। हालांकि जीएचआई के कुल स्कोर में भारत की स्थिति और ख़राब हुई है। 2014 में जहाँ ये स्कोर 28.2 था वहीं 2022 में यह 29.1 हो गया है।

दुनिया की कुल भूख की स्थिति की बात की जाए तो हालिया सालों में यह स्थिर रही है। साल 2022 की रिपोर्ट में पूरी दुनिया के मामले में भूख की स्थिति को मध्य श्रेणी में रखा गया है। 2014 में जहाँ दुनिया का कुल स्कोर 19.1 था वो 2022 में घटकर 18.2 हुआ है।

इस रिपोर्ट में कुल 44 देश ऐसे हैं जिनकी स्थिति बेहद ख़तरनाक स्तर पर है जिनमें भारत भी शामिल है।

मोदी सरकार पर निशाना

ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्र की मोदी सरकार की आलोचनाएं भी शुरू हो गई हैं।

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ट्वीट किया है कि ‘माननीय प्रधानमंत्री कुपोषण, भूख और बच्चों में कुपोषण जैसे असली मुद्दों को कब देखेंगे।’

चिदंबरम ने आगे लिखा कि ‘भारत के 22.4 करोड़ लोगों को कुपोषित माना गया है। भारत की ग्लोबल हंगर इंडेक्स में रैंक लगभग बिल्कुल नीचे है, 121 देशों में 107वें स्थान पर।’

सीपीएम नेता और केरल के पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने ट्वीट किया है कि ‘भारत को 2022 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 107वां स्थान मिला है। सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान दक्षिण एशियाई देशों में हमसे नीचे है। साल 2015 में भारत की रैंक 93 थी। बच्चों के कुपोषण के पैमाने में भारत की स्थिति बिगड़ते हुए 19.3 फ़ीसदी हो गई है जो कि दुनिया में सबसे अधिक है।’

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया है कि ‘2014 के बाद से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की तेज़ी से गिरावट हुई है। मोदी सरकार भारत के लिए विनाशकारी है। साढ़े आठ सालों में भारत को इस अंधेरे के युग में लाने के लिए सरकार को ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।’

केशव पंथी नामक एक ट्विटर यूज़र ने बीजेपी नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘आपकी गंदी राजनीति और आप लोगों के कारण हम ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 107वें स्थान पर हैं। आपको शर्म आनी चाहिए।’

भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

भारत सकल घरेलू उत्पाद यानी (जीडीपी) के मामले में ब्रिटेन को पछाड़कर विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने मार्च 2022 के अंत में ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया था। ब्लूमबर्ग ने ये निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के आंकड़ों के आधार पर निकाला था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक इस साल मार्च के अंत में भारत की अर्थव्यवस्था 854.7 अरब डॉलर की थी जबकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 816 अरब डॉलर की थी।

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  • गरीबी के मामले में नाइजीरिया को भी पीछे छोड़ भारत बना नंबर वन, देश में 18.92 करोड़ लोग कुपोषित

ब्लूमबर्ग के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ सालों में भारत ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से और भी आगे निकल जाएगा।

वहीं एमएसीडी बीबी संकेतक की उपस्थिति हाल ही में आईएमएफ़ की एक ताज़ा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि 2022 में भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.8 प्रतिशत रहेगी। पहले ये अनुमान 7.4 प्रतिशत था।

आईएमएफ़ का ये भी कहना है कि 2023 में विकास दर और गिर सकती है और इसके 6.1 फ़ीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से आगे बढ़ती रहेगी।

साल 2022 की ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी हुई है जिसमें भारत से बेहतर स्थिति में उसके पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश हैं।

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एडीबी ने 2022-23 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान सात फीसदी पर अपरिवर्तित रखा

नयी दिल्ली, 14 दिसंबर (भाषा) एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 2022-23 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को सात फीसदी पर अपरिवतर्तित रखा है। हालांकि उसका अनुमान है कि एशिया की वृद्धि की रफ्तार पहले के मुकाबले कुछ कमजोर रहने वाली है।

एडीबी ने 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि सात फीसदी रहने का जो अनुमान जताया है वह सितंबर के अनुमान के समान ही है, इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। हालांकि 2021-22 में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 8.एमएसीडी बीबी संकेतक की उपस्थिति 7 फीसदी रही थी।

उसने वित्त वर्ष 2023-2024 के लिए भी जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.2 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा है।

एडीबी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस वर्ष एशिया 4.2 फीसदी की दर से बढ़ेगा, 2023 में उसकी वृद्धि 4.6 फीसदी की दर से होने का अनुमान है। हालांकि पहले उसने इस वर्ष एशिया की वृद्धि दर 4.3 फीसदी और 2023 में 4.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की दर से वृद्धि करने का अनुमान है जिसकी वजह उसकी मजबूत घरेलू बुनियाद है।’’ इसमें आगे कहा गया, ‘‘उच्च आवृत्ति वाले कुछ हालिया संकेतक अनुमान से कहीं अधिक अनुकूल हैं मसलन उपभोक्ताओं का विश्वास, बिजली आपूर्ति, पीएमआई जबकि कुछ ऐसे संकेतक हैं जो पूरी तरह से अनुकूल नहीं हैं वे हैं निर्यात विशेषकर कपड़ा और लौह अयस्क का तथा उपभोक्ता उत्पादों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक।’’

इसमें कहा गया कि 2023-24 के लिए 7.2 फीसदी के वृद्धि के अनुमान को बरकरार रखने की वजह संरचनात्मक सुधार और निजी निवेश को उत्प्रेरित करने वाले सार्वजनिक निवेश के सकारात्मक प्रभाव हैं।’’

एडीबी ने कहा, ‘‘भारत में दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के बीच अर्थव्यवस्था 6.3 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो सार्वजनिक खपत में 4.4 फीसदी का संकुचन दर्शाता है। जबकि वैश्विक स्तर पर नरमी के बावजूद निर्यात 11.5 फीसदी की दर से बढ़ा।’’

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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